कविता: मौसम का तकाजा हैं

Weather Poem Poem recitation Shayari from Diary

शिखा सिहं, लखनऊ (उ.प्र.)

मौसम का तकाजा है

क्योंकि इतनी सी इल्तिजा है

बस इस बार साथ चले आना

हर बार संग आती है

 

सिर्फ तुम्हारी खुशबू।

इस बार तुम चले आना

हर बार संग आती है

सिर्फ तुम्हारी हंसी की खनक।

इस बार तुम चले आना

 

हर बार संग आती है

सिर्फ तुम्हारे हाथों की छुअन।

इस बार तुम चले आना

हर बार संग आता है

सिर्फ तुम्हारे अक्स का साया।

इस बार तुम चले आना

हर बार संग आती है

सिर्फ तुम्हारे हाथों की चुभन।

इस बार तुम पूरे के पूरे चले आना

मौसम का तकाजा है

इसलिए बस इतनी सी इल्तिजा है।

 

डायरी से शायरी- रौनक खान

तुम राधा सी, मैं कृष्ण सा

तुम कस्तुरी, मैं मृगतृष्णा।

प्रेम अलंकार की परिभाषा तुम

श्वास, राग, बंसी हो तुम।।

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