बेरोजगारी की मार: जब तक नौकरी न मिले, इंजिनियर साइकल रिपेयर करे

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देश में बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने इंजिनियरिंग के लिए एक अनोखा रास्ता खोजा है। मिली जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार मैकेनिकल इंजिनियरिंग के छात्रों को साइकल रिपेयर करने के काम में लगाना चाहती है, जब तक उन्हें जॉब नहीं मिल जाती। वही इस बारे में राज्य के शिक्षा मंत्री एस. सुरेश कुमार ने बताया की स्टूडेंट्स की टूटी और खराब साइकलों को इंजिनियरिंग के स्टूडेंट्स ठीक करेंगे।

उहोंने आगे बताया की ऐसे में उनकी स्किल भी मजबूत होगी और उनमें बेरोजगारी की समस्या भी कम होगी। इसका प्रोजेक्ट का मकसद सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास कराना है। मंत्री के मुताबिक सरकार की तरफ से स्टूडेंट्स को जो साइकलें दी गई हैं, उनमें से ढेरों खराब हैं या अच्छी हालत में नहीं हैं। ऐसे में वे यूं ही पड़ी हुई हैं। इस काम के लिए इंजिनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से संपर्क किया जाएगा।

आपको बता दे की सरकारी स्कूलों में आठवीं के छात्रों को निशुल्क साइकल बांटने में सरकार करीब 185 करोड़ रुपये खर्च करती है। लेकिन, जल्द ही ये साइकल खराब हो जाती हैं और फिर छात्र उसका इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। इसलिए इन साइकलों को ठीक करने का जिम्मा सरकार मैकेनिकल इंजिनियरिंग के स्टूडेंट्स को देना चाहती है।

आंकड़ों के मुताबिक इस साल सरकार की तरफ से स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को 2.52 लाख और लड़कों को 2.61 लाख साइकलें बांटी जाएंगी। सरकार का मानना है कि मुफ्त में इन साइकलों को देने के बाद भी स्टूडेंट्स अक्सर इनका इस्तेमाल नहीं करते। मंत्री सुरेश कुमार के मुताबिक ज्यादातर स्टूडेंट्स कहते हैं कि साइकल खराब हो गई या टूटी हुई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नजदीकी कॉलेजों से संपर्क किया जाएगा।

इंजिनियरिंग स्टूडेंट्स बेरोजगार क्यों?
पिछले कुछ बरसों से देश में इंजिनियरों में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या रही है। 10 साल पहले मैकिंसे रिपोर्ट में इस समस्या के कारणों के बारे में बताया गया था। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि मात्र 25 फीसदी इंजिनियरिंग स्टूडेंट्स ही जॉब के लायक हैं। वहीं, पिछले साल टेक महिंद्रा के सीईओ और एमडी पी. गुरनानी ने कहा था कि 94 फीसदी इंजिनियरिंग ग्रेजुएट में नौकरी पाने की क्षमता नहीं है।

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