समय की मांग: UBI के तहत सभी नागरिकों को मिले न्यूनतम आय की गारंटी

# Samaykimang: Guarantee of minimum income to all citizens under UBI

कोरोनावायरस के कारण देश में बेरोजगारी अपने चरम सीमा पर है। जून-जुलाई में स्थितियां और खराब होने के संकेत हैं। छोटी से बड़ी तक की कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती की है। ऐसी स्थिति में लोगों की आजीविका खतरे में है।

इस प्रकार की स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य की टकराहट जायज है। ऐसी स्थिति में भारत सरकार को यूनिवर्सल बेसिक इनकम पूरे देश में लागू करने की आवश्यकता है।

आर्थिक संव्यवहार बनाए रखने में यह व्यवस्था काफी मददगार हो सकती है। अभी हाल में ही जापान ने प्रत्येक व्यक्ति को एक लाख येन देने का निर्णय किया है तो वहीं कनाडा ने प्रत्येक व्यक्ति को 2500 डॉलर प्रति माह देने का फैसला लिया है।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम के तहत देश के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी काग़ज़ी शर्त के एकमुश्त नगद हस्तांतरण करने की व्यवस्था है। इसमें नागरिकों से बिना कोई शर्त के साथ कोई पहचान के बिना एक निश्चित आय की गारंटी कुछ समय के लिए दी जाती है।

यूनिवर्सल बेसिक इनकम के लिए कोई टारगेटेड समुदाय की जगह; अमीर-गरीबों में सामान रूप से धन का वितरण किया जाता है। इस योजना से देश में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इस योजना में अनिश्चितता का जो भाव है। वह चिंता का विषय बना हुआ है। की सरकार के द्वारा दिए गए रुपयों का दुरुपयोग होने के बजाय स्वरोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर ही खर्च होगा। इसकी कोई गारंटी नहीं है, रुपए का उपयोग मादक पदार्थों में नहीं होगा।

न्यूनतम आय क्या है?

अमेरिकी क्रांतिकारी, दार्शनिक थॉमस मूर ने हर किसी के लिये एक समान आय की मांग की थी। वह चाहते थे कि एक ऐसा ‘राष्ट्रीय कोष’ हो जिसके माध्यम से हर वयस्क को एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाए। भारत के संदर्भ में साल 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में UBI को एक अध्याय के रूप में सम्मिलित किया गया था।

यूबीआई के विभिन्न विधियों पर चर्चा की गई थी। आर्थिक सर्वेक्षण में UBI योजना को गरीबी कम करने के लिये एक संभावित विकल्प बताया गया था। यह बिना शर्त नकद ट्रांसफर प्रक्रिया है। अर्थात् किसी भी व्यक्ति को UBI हेतु पात्र होने के लिये बेरोज़गारी की स्थिति या सामाजिक-आर्थिक पहचान को साबित करने की आवश्यकता नहीं है।

मध्य प्रदेश के प्रयोग के परिणाम

मध्य प्रदेश में ऐसी एक योजना को शुरू किया गया था, जिसमें पायलट प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश के आठ गाँवों में छह हजार से ज़्यादा लोगों को फ्री मासिक भुगतान किया गया। जिसका परिणाम आया, वह बड़ा ही सार्थक रहा है। अधिकांश ग्रामीणों ने उस पैसे का उपयोग घरेलू सुविधा बढ़ाने (शौचालय, दीवार, छत) में किया, ताकि मलेरिया के खिलाफ सावधानी बरती जा सके। अतः हम कह सकते हैं कि यह एक अच्छी योजना हो सकती है।

 UBI से लाभ

वर्तमान में केंद्र सरकार देश के नागरिकों के लिए 950 योजनाएं चला रही हैं। इन योजनाओं को चलाने के लिए जीडीपी का 5% खर्च होता है। अगर यहीं पैसा यूनिवर्सल बेसिक इनकम के तहत सभी को बराबर दे जाए, तो समाज में सामाजिक विषमता को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण में भी इस बात को स्वीकार किया गया है, की इससे गरीबों को प्रत्यक्ष रूप से पैसा मिलेगा और उनकी स्थिति में सुधार होगा। यूबीआई लागू होने से देश में भ्रष्टाचार में कमी आने की भी संभावनाएं हैं।

ऐसी स्थिति में सरकार को इन योजनाएं को न चला कर, लोगों को डायरेक्ट मुद्रा दे। जिससे की वो अपनी जरूरत के अनुसार पैसा खर्च कर सकें। इसमें सबसे बड़ी समस्या है, कि वह न्यूनतम मुद्रा क्या होगी? और कितने समय के लिए दी जाएगी? लेकिन…

इसमें कोई दो राय की बात नहीं की यूनिवर्सल बेसिक इनकम से भारत की जनता के स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार के साथ उनके जीवन-स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास होगा। इसके लिए भारत सरकार को तत्कालीन प्रभाव से वर्तमान में सभी योजनाओं के माध्यम से दी जा रही सब्सिडी को बंद कर देना चाहिए। बेसिक इनकम की व्यवस्था से समाज के लिये एक निश्चित आय की व्यवस्था करना कहीं अन्य परियोजनाओं के ज़्यादा प्रभावी और व्यावहारिक होने की आशा प्रकट करते हैं।

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