इंडिया और हिंदुस्तान में पलायन

Migration to India and India  Disaster Management Act 2005

कोरोना काल चालू है। महामारी अपने चरम पर आनी अभी बाकी है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां भी संतोषजनक नहीं है। हिंदुस्तान और इंडिया के बीच खाई है। हिंदुस्तान आज सड़कों पर आ गया है। उनका दर्द देखकर कलेजे से भी आंसू निकल आते हैं। उसे अपने गांव की याद आ रही है।

रो तो इंडिया भी रहा है, लेकिन मन ही मन। जिन प्रदेश में मजदूरों के पसीने से विकास की खुशबू फैली हुई है। वह भी मजदूरों के खुशहाली पर ध्यान नहीं दे रहे है। पलायन। एक बड़ी समस्या है। समाधान भी हैं। लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही हैं। एक्सपर्ट बता रहे हैं “जो जहां है वहीं रहे”। अब इनसे यह पूछना चाहिए की भूखें रहे?

मजदूरों को भी गांव की याद बड़े दिनों बाद आई हैं। क्योंकि उन्हें विश्वास है कि वह गांव में भूखा नहीं मरेंगे। यह दूसरी बात है, सिर्फ कृषि क्षेत्र के भरोसे इनका जीवन यापन संभव नहीं है। गावों के सतर्कता के भरोसे इससे निपटा जा सकता है। सबसे बड़ी समस्या यहां आ रही है, की 5 एकड़ में फैले 500 शहरी परिवार के 80% परिवार एक दूसरे से परिचित नहीं होंगे।

परंतु गांवों की बनावट सामाजिक है, मान ‌लिजिए 4 वर्ग किमी में फैले एक गांव में 5000 हजार परिवार रहते हैं, तो वे एक-दूसरे को अच्छे तरीके से जानते हैं। यही एक समस्या है, कि हम कहीं यहां लापरवाह ना हो जाए।

पलायन का समाधान

1947 के बाद इतनी जनसंख्या में लोगों का पलायन हो रहा है। सबसे पहला सवाल है, की पलायन ही क्यों? जवाब हैं, अच्छे रोजगार। चार मुद्दे हैं जिन्हें हमें समझना चाहिए। पहला मुद्दा है स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों को काम के कौशल के हिसाब से पहले काम मिलना चाहिए।

दूसरा 90 % मजदूर असंगठित हैं, सरकार को तत्कालीन इनकी सूची बनवानी चाहिए। जिससे इन्हें वर्तमान में जारी योजनाओं का लाभ मिल सके। तीसरी बात हैं की जहां पर ये मजदूर काम करते हैं, वो संस्थान कोई जिम्मेदारी नहीं समझते हैं।

सरकार को चाहिए कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत मजदूरों को तनख्वाह के 50 आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं। आख़िरी और चौथा मुद्दा हैं, की राज्यों की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है, की उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं लांच करें। जिसका लाभ उन्हें कम कागजी लिखा- पढ़ी करके हासिल हों। साथ ही मजदूरों को पैदल जाने से ना रोका जाए। क्योंकि संविधान के आर्टिकल19 के तहत नागरिकों को अधिकार है।­­­­

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