किताबनामा भाग-1: ‘भारतीय मुसलमान’ की कहानी, अंग्रेजों की जुबानी                                              

Kitabnama Part-1 The Story of Indian Muslims, British Speak

(इस लेख में हम किसी चर्चित किताब में से कुछ अंश प्रकाशित करेंगे, आज के इस आर्टिकल में भारतीय मुसलमान किताब के लेखक विलियम डब्ल्यू हंटर; हिंदी अनुवाद नरेश “नदीम” से लिया गया है।)

हमारी मुस्लिम प्रजा में बेचैनी की यह भावना जिस तीन तरफा में व्यक्त हुई है, मैं इसे उसी रूप में दिखाने का प्रयास करूंगा. मैं संक्षेप में उन घटनाओं का वर्णन करूंगा जिनके कारण हमारी सीमा पर एक विद्रोही खेमा पैदा हुआ है, और पाठक के सामने कुछ एक ऐसी भारी तबाहियों को प्रस्तुत करूंगा.

जिनमें इसने ब्रिटिश सत्ता को उलझाया है. दूसरे अध्याय में मैं उस राष्ट्रद्रोह संगठन को स्पष्ट करूंगा,जिसके द्वारा विद्रोही खेमा साम्राज्य के अंदरूनी जिलों से बेरोक टोक धन और जन पाता रहा है.

उसके बाद मैं उन वैधानिक बहसों को सामने लाऊंगा जिनको इस असामान्य स्थिति ने जन्म दिया है. ऐसी बहसों को जो दिखाती हैं कि बगावत के फरिश्तों को जहरीली शिक्षाओं को मुसलमान किस कदर उत्सुकता से बेचैन करते रहे हैं.

जबकि एक छोटा सा हिस्सा चिंतित होकर फिका विधिशास्त्र की चतुराई भरी व्याख्या ओं के सहारे विद्रोह के दायित्व से मुक्ति पाने का प्रयास करता रहा है लेकिन अगर मैंने इतने पर ही बस किया तो वह सिर्फ आधी सच्चाई होगी भारत के मुसलमान भारत में ब्रिटिश सत्ता के लिए भयानक खतरे के स्रोत हैं.

और अनेक वर्षों से रह रहे हैं किसी न किसी कारण से वह हमारी व्यवस्था से कटे रहे हैं और अधिक लोच अपनाने वाले हिन्दुओं ने जिन परिवर्तनों को हसीं खुशी स्वीकार किया हैं, उसे मुसलमानों ने गहरी निजी चोटों के रूप में देखा हैं.

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