सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग

Increased abuse of social media

दुनिया में सोशल मीडिया के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता खतरे में पड़ती जा रही हैं। अभी हाल में हुई अमेरिकी हिंसा सोशल मीडिया द्वारा ही विनियोजित थी।

इससे पूर्व हम लोग अरब की सड़कों पर सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव को देख चुके हैं। कई शोधों में खुलासा हुआ है, की सोशल मीडिया के ज्यादा उपयोग से मस्तिक में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

इससे व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। वहीं साइबर-बुलिंग, फेक न्यूज़, हेट स्पीच की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इन प्लेटफार्मो पर डेटा चोरी की भी संभावनाएं कम नहीं हो रही हैं।

साइबर अपराधों की संख्या में दिनों दिन इजाफा हो रहा है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को कैसे रोका जाए? सोशल मीडिया का सदुपयोग कैसे किया जाए? इन सभी विषयों पर चर्चा करने की आवश्यकता है। भारत में तकरीबन 350 मिलियन सोशल मीडिया यूज़र हैं और अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक यह संख्या लगभग 447 मिलियन तक पहुँच जाएगी।

इसमें प्रत्येक व्यक्ति सोशल मीडिया पर रोजाना 2.4 घंटे का समय देता हैं।

इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के कारण भी चर्चा में बना रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।

इस तरह सोशल मीडिया के दुरूपयोग लगातार बढ़ते जा रहे है। भविष्य में संभावित खतरे बड़े नजर आ रहे हैं। इससे निपटने के लिए अभी से ही कारगर उपाय की जरुरत है।

आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2018-19 में फेसबुक, ट्विटर समेत कई साइटों पर 3,245 आपत्तिजनक सामग्रियों के मिलने की शिकायत की गई थी। जिनमें से जून 2019 तक 2,662 सामग्रियाँ हटा दी गईं थीं।

दूसरी ओर सोशल मीडिया के ज़रिये ऐतिहासिक तथ्यों को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। न केवल ऐतिहासिक घटनाओं को अलग रूप में पेश करने की कोशिश हो रही है बल्कि आज़ादी के सूत्रधार रहे नेताओं के बारे में भी गलत धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

भारत में फेक न्यूज़ का कोई क़ानून ना होने से समस्या जस की तस हैं। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2008 के दायरे में आते हैं। इसमें फेक खबरों की पुष्टि होने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफार्म पोस्ट को हटाता है।

लेकिन उस पोस्ट को पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती है। इससे उनका हौसला अफजाई होता है। केंद्र सरकार को सोशल मीडिया के दुरुपयोग से निपटने हेतु सख्त कानून बनाने की आवशकता है। जिससे समस्या का समाधान कुछ हद तक किया जा सके।

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