भारत-अमेरिका दोस्ती के निहितार्थ

Implications of India-US Friendship

भारत और अमेरिका की गहरी दोस्ती से,  रूस की दोस्ती में खटास पैदा करने कर सकती हैं. इसका असर एशिया के बाकी देशों के साथ भारत के संबंध पर भी देखने को मिल सकता है.

एशिया में ज्यादातर देश चीन का प्रभुत्व स्वीकार करते हैं क्योंकि वह एशियाई हैं जबकि अमेरिका भारत के जरिए एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है. भारत सरकार को ऐसा सामने से बनाने की जरूरत है जिससे एशिया भी बैलेंस रहे और अमेरिका भी.

क्योंकि अमेरिका भारत के सहारे एशिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश ना करें, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता रखें. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि आज की तारीख में नॉन एलाइनमेंट(गुटनिरपेक्षता) का एक पुराना काम शिफ्ट हो चुका है.

भारत किसी के अलायंस का हिस्सा नहीं होगा. उनके इस बयान के बाद ही अमेरिका के विदेश मंत्रालय का बयान आया कि अमेरिका चीन को अलग थलग करने के लिए एक अलग गठबंधन बनाना चाहता है.

अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से विवाद आर्थिक क्षेत्र और राजनीति में बढ़ता जा रहा है. दोनों देश एक दूसरे के ऊपर कोई ना कोई कार्यवाही करते रहते हैं. दोनों अपनी प्रवक्ता काम रखने के लिए; एक दूसरे के कई कार्यालय को भी बंद करने का प्रयास करते हैं.

अमेरिका की मंशा है कि वह भारत के जरिए चीन को अलग-थलग करने का प्रयास करें,  भारत की भी यह कूटनीतिक मंशा है. लेकिन चीन को कूटनीतिक स्तर पर अलग-थलग करने से एशिया के और देशों की दोस्ती दांव पर लगाना जरूरी नहीं है. भारत को अपनी विदेश नीति में सुधार करते हुए ऐसा विकल्प निकालना चाहिए जिसमें भारत का हित हो.

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