किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह…

Farmers Messiah Chaudhary Charan Singh...

चौधरी चरण सिंह जाट समुदाय के थे। विधायक से लेकर प्रधानमंत्री तक बने। थोड़ा अक्कड़ थे, थोड़ा फक्कड़ भी थे। कोई दुराव या कोई कपट नहीं, जो अच्छा लगता था ताल ठोक के कहते थे। चाहे नेहरु हो या इंदिरा गांधी किसी से नहीं डरते थे। 1902 में गाजियाबाद के नूरपुर गांव में पैदा हुए। कानून की पढ़ाई पूरी की उसके बाद 1929 में पूर्ण स्वराज्य के लिए अपने जिले में कांग्रेस कमेटी का गठन किया।

अंग्रेजों के बहुत डंडे खाए कई बार जेल गए; दो डायरी और एक शिष्टाचार नामक किताब भी लिखी। जो जमीन जोते-बोए वही मालिक का सिद्धांत रखते थे, इसी से 1952 में जमीदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को न्याय मिला। कांग्रेस के सेवक भी रहे लेकिन बात पड़ी तो इंदिरा गांधी को कोड़े मारने जैसी बात कहने से भी हिचके नहीं।

कांग्रेस छोड़ी

यूपी में जब सुचिता कृपलानी मुख्यमंत्री बना दी गई तब चौधरी चरण सिंह को लगा की हम को अनदेखा किया गया है। उसके बाद से ही गैर कांग्रेसी सरकार बनाने की बात चलने लगी, चौधरी को मौका मिला तो 1967 में रोते हुए पार्टी छोड़ दी। और 2 दिन बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 1977 में जगजीवन को चौधरी साहब ने प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया। और मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनवा दिए। हालांकि बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ था।

इंदिरा की गिरफ्तारी, बने पीएम

मोरारजी देसाई की सरकार में चौधरी उप प्रधानमंत्री थे। उन्होंने इंदिरा गांधी को गिरफ्तार करने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि अगले दिन मजिस्ट्रेट ने उनकी रिहाई का आदेश दे दिया। एक बार उन्होंने यहां तक कहा कि मैं तो चाहता हूँ कि इंदिरा गाँधी को क्नॉट प्लेस में खड़ा कर कोड़े लगवाए जाएं। शाह कमीशन में रोज गवाही और बयानों के बाद भी इंदिरा गांधी को जेल भिजवा कर ही दम लिया।

संजय गांधी के चक्कर में प्रधानमंत्री बने, और कांग्रेस ने वही राजनीति का शतरंज खेला और बिना संसद में बोले ही सरकार गिर गई। किसानों के लिए उन्होंने जमीदारी प्रथा के उन्मूलन के साथ नाबार्ड, खाद के टैक्स में कमी, वि० मंत्री रहते हुए पेट्रोल और कृषि यंत्रों में छूट इत्यादि काम किए। अंग्रेजी भी खूब जानते थे। अबॉलिशन ऑफ़ ज़मींदारी’और ‘इंडियाज पॉवर्टी एण्ड इट्स सोल्यूशंस’ किताबें भी लिखीं। आज ही के दिन (29 मई) 1987 को चौधरी चरण सिंह का निधन हो गया।

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